आजु बधाई है बरसानैं
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 104 of 139
(राग जयतिश्री व देवगन्धार)
आजु बधाई है बरसानैं।
कुँवरि किसोरी जनम लयौ, सब लोक बजे सहदानैं॥ [1]
कहत नंद वृषभानराय सौं, और बात को जानैं।
आजु भैया हम सब व्रजवासी, तेरे ही हाथ बिकानैं॥ [2]
या कन्या के आगें कोटिक, बेटनिं कौ अब मानैं।
तेरे भलैं, भलौ सबही कौ, आनँद कौंन बखानैं॥ [3]
छैल छबीले ग्वाल रँगीले, हरद, दही लपटानैं।
भूषन वसन विविधि पहिरे, तन गनत न राजा रानैं॥ [4]
नाँचत गावत प्रमुदित ह्वै नर, नारिनु को पहिचानैं।
व्यास रसिक सब तन मन फूलै, नीरस सबै खिसानैं॥ [5]
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, उत्तरार्ध (355)
(राग जयतिश्री वी देवगंधार) अजु बधाई है बरसाने। कुंवारी लड़की को जन्म दो, सब तुम्हारा साथ देंगे. आज भैया हम सब व्रजवासी आपके हाथ बिक गये हैं.. [2] या लड़की का अगला कोट, अब लड़की का बेटा कौन है? आपका आशीर्वाद, सब धन्य हैं, खुशियाँ कौन बाँट सकता है? [3] रंग-बिरंगे गौ-बाल, हरड़, दही स्वादिष्ट होते हैं। आभूषण, पोशाक, विभिन्न वस्त्र, शारीरिक गिनती, राजा और रानी। [4] नाच गांव खुशहाल, नारी पहचानी। व्यास रसिक, तन मन सब खिले, सब मुरझाये उदास। [5] - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, स्वर्गीय (355)