खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 112 of 139
कहत हौं बने न ब्रज की रीति।
सब गोपाल उपासक, तन मन वृन्दावन सौं प्रीती॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (5)
मैं कहता हूं, आइए हम ब्रज की परंपरा का पालन करें। सभी गोपाल उपासक वृन्दावन को पूरे दिल और दिमाग से प्यार करते हैं.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (5)