श्रीराधावल्लभ तुम मेरे हित
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 126 of 139
(राग कान्हरो)
परम धन राधा नाम आधार।
जाकौ श्याम मुरली में टेरत, सुमिरत बारम्बार॥ [1]
जंत्र, मंत्र और वेद तंत्र में, सभी तार को तार।
श्री शुक, प्रगट कियौ नहीं यातें, जानी सार को सार॥ [2]
कोटिन रूप धरे नंदनंदन, तोउ न पायौ पार।
'व्यासदास' अब प्रगट बखानत, डारि भार में भार॥ [3]
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (38)
(राग कान्हारो) परम धन राधा नाम आधार। जाकौ श्याम मुरली में तेरात, सुमिरत बाराम्बर..[1] मंत्र, मंत्र और वेद तंत्र पुरुष, सभी स्तर एक समान हैं। श्रीशुक इन बातों को प्रकट न करो, मस्तक का सार जानो.. [2] अनेक रूप धरे नन्दनन्दन, परन्तु तुम मुझ पर प्रेम नहीं करते। 'व्यासदास' अब प्रकट होते हैं, पुरुष भार से भरपूर.. [3] - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (38)