खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार

Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास

Verse 128 of 139

श्री हरि भक्ति न जानहीं, मायाही सौं हेत। जीवत ह्वै हैं पातकी, मरिकैं ह्वै हैं प्रेत॥ - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (69) श्रीहरि के प्रति न तो भक्ति है और न ही प्रेम। जीवित पक्षी जैसे हैं, मृत भूत जैसे हैं.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (69)
खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सारखरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार