खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 139 of 139
व्यास विवेकी भगत सौं दृढ़ करि कीजै प्रीति।
अविवेकी कौ संग तजि, इहै भक्ति की रीति॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (67)
व्यास विवेकी भक्त, प्रेम दिखाओ। जो अविवेकी हैं उनको मेरा नमस्कार है, यही भक्ति का मार्ग है.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (67)