खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 138 of 139
व्यास स्वामिनी रास मंडल में, चुटकिनी पिए नचावे ।
जौ पे वृन्दावन धन भावै॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (221)
व्यास स्वामिनी रस मण्डल पुरुष, छुटाकिनी पा नचावे। वृन्दावन की सम्पत्ति जौ पर आधारित है.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (221)