खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 18 of 139
नैंन न मूँदे ध्यानकौं, किये न अंगनि-न्यास।
नाँचि गाई रासहिं मिले, बसि वृंदावन व्यास॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धान्त की साखी (21)
तुम अपनी आंखें बंद क्यों नहीं कर लेतीं और किसी से शादी नहीं करतीं. नांचि ग रसहिं मि, बसि वृन्दावन व्यास.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत मित्र (21)