खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 2 of 139
व्यास आस हरिवंश की, तिनहीं कौ बड़भाग।
वृंदावन की कुंज में, सदा रहत अनुराग॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (2)
व्यास हरिवंश के हैं, भूलते क्यों नहीं? वृन्दावन की बगिया में, सदा रहता है प्रेम.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत साखी (2)