खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 3 of 139
राधा-वल्लभ ध्याइ कैं, और ध्याइयै कौंन।
व्यासहि देत बनै नहीं, बरी बरी प्रति लौंन॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (4)
राधा-वल्लभ, मैं क्यों ध्यान करूँ, और किसका ध्यान करूँ? व्यासहिं नहिं होय देता, बारी बारी प्रति लौना.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत मित्र (4)