खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 29 of 139
व्यास रसिक तासौं कहैं, काटै माया फंद।
हरिजन सौं हिलमिल रहै, कबहुँ न व्यापत द्वन्द॥
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, साखी (38)
व्यास रसिक तासौं कहते हैं, माया का पाश काट दो। हरिजन हिले डुले रहते हैं, कौन बहु न झगडा करती.. - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, साखी (38)