खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार

Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास

Verse 28 of 139

वृंदावन को वास करि, छाँड़ि जगतकी आस। व्यास सु रसिकन हिल मिले, ह्वै नव जनम प्रकाश॥ - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (36) वृन्दावन में रहो, इस संसार का सौंदर्य। व्यास सु रसिकन हिल मि, हे नव जन्म ज्योति.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (36)
खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सारखरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार