खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 5 of 139
(श्री) राधावल्लभ परम धन, व्यासहि फबि गई लूट।
खरचत हूँ निघटैं नहीं, भरे भँडार अटूट॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (5)
(श्री) राधावल्लभ परम धन, व्यासहि फबि गाइ लुट। बसने की जरूरत नहीं, भंडार अक्षय है.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत मित्र (5)