खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार

Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास

Verse 51 of 139

व्यास बड़े हरिके जना, हरिहि नवावत माथ। जिनके हियमें वसत हैं, तीन लोक के नाथ॥ - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (61) व्यास बड़े हरिके जाना, हरिहि नावत मठ। जिनके हृदय में तीनों लोकों के स्वामी विराजमान हैं.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (61)
कहाँ हौं वृंदावन तजि जाउँखरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार