खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार

Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास

Verse 52 of 139

व्यास बड़े हरिके जना, हरि जस में भये लीन। तन मन वचसा हरि बिना, और कछू नहिं कीन॥ - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (62) व्यास बड़े हरिके जना, हरि जस मन भये लिन। हरि बिना तन, मन, विचार, और कुछ नहीं.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (62)
खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सारखरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार