खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार

Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास

Verse 69 of 139

व्यास रसिक सब चलि बसे, नीरस रहे कु-वंश। वग ठगकी संगति भई, परिहरि गए जु हंस॥ - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (98) व्यास रसिक तथा समस्त नीच एवं दुष्ट कुल निराश रहते हैं। वागा ठगकी संगत भाई, परहरि गए जू हंस.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (98)
महिमा स्याम की हम जानीखरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार