खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार

Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास

Verse 72 of 139

व्यास कनक अरु कामिनी, तजियै भजियै दूरी। हरिसौं अंतर पारिहैं, मुख दै जैहैं धूरि॥ - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (106) व्यास कनक अरु कामिनी, तजियै भजियै दूरि। सैकड़ों भेद जानते हैं हरि, जहां जाते हैं मुख देते हैं.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (106)
खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सारखरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार