खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 73 of 139
व्यास कनक अरु कामिनी, ये लाँबी तरवारि।
चले हुते हरि भजनकौं, बीचहि लीनैं मारि॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धान्त की साखी (107)
व्यास कनक और कामिनी, यह दीर्घ वृक्ष। जाते समय हरि भजन, बिच्छू को किसने मारा... - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (107)