खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार

Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास

Verse 75 of 139

जुगलचरन हिय ना धरै, मिलै न संतनि दौरि। व्यासदास ते जगत में, परे पराई पौरि॥ - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (111) जुगलचरण न टिके, स्थिरता न आई। व्यासदास संसार के पुरुष हैं, उनसे परे पराया है.. - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत मित्र (111)
खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सारखरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार