खरौ-खरौ सब लेत हैं परखि पारखू सार
Vyas Vani — श्री हरिराम व्यास
Verse 82 of 139
व्यास आस इत जगतकी, उत चाहत हिय स्याम।
निलज अधम सकुचत नहीं, चाहत है अभिराम॥
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (133)
व्यास इस जगत की आशा, तुम चाहो स्याम। निलज अधम सीमित नहीं, चाह अभिराम.. - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, सखी सिद्धांत (133)