राधामाधव अद्भुत जोरी

Yugal Shataka — श्री भट्ट देवाचार्य

Verse 15 of 29

नैंक नैन की कोर मोरि मोहन बस कीनें। राधे तेरे रूप की पटतर को दीनें॥ [1] कमल कोस अलि ज्यौं लैं तारे रंगभीनें। श्रीभट तन अंजन छुवै लालन लव लीने॥ [2] - श्री भट्ट देवाचार्य, युगल शतक (65) नैनक नैन की कोर मोरी मोहन बस कीनेन। राधे, मुझे अपने स्वरूप का यथासंभव ज्ञान दो.. [1] कमल के फूल तारों के समान सुन्दर हैं। श्री भट्ट तन अंजन चुवै लालन लव लाइन.. [2] - श्री भट्ट देवाचार्य, डबल सेंचुरी (65)
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