राधामाधव अद्भुत जोरी

Yugal Shataka — श्री भट्ट देवाचार्य

Verse 14 of 29

मोहन ब्रज बन भूमि सब, मोहन सहज समाज। मोहन जमुना कुँज जहॅ, बिहरत है जुबराज॥ - श्री भट्ट देवाचार्य, युगल शतक (4) सारी धरा मोहन ब्रज, मोहन सहज समाज हो गई। मोहन जमुना कुंज जाहे, बिहारत है जुबारज.. - श्री भट्ट देवाचार्य, दोहरा शतक (4)
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