ब्रज भूमि मोहिनी मैं जानि

Yugal Shataka — श्री भट्ट देवाचार्य

Verse 6 of 29

(राग सारंग, एकताल) ब्रज भूमि मोहिनी मैं जानि। मोहनि कुंज मोहन वृन्दावन मोहनि जमुना पानी। मोहनि नारि सकल गोकुल की, बोलत मोहनी वानी। श्रीभट्ट के प्रभु मोहन नागर, मोहनी राधा रानी॥ - श्री भट्ट देवाचार्य, युगल शतक (04) (राग सारंग, एकताल) ब्रज भूमि मोहिनी मैं जानि। मोहनी कुंज मोहन वृन्दावन मोहनी जमुना पानी। सकल गोकुल की सुन्दरी मनमोहक वाणी से बोलती है। श्री भट्ट की प्रभु मोहन नगर, मोहनी राधा रानी.. - श्री भट्ट देवाचार्य, डबल सेंचुरी (04)
राधामाधव अद्भुत जोरीदोऊ मिल करत भामती बतियाँ