दोऊ मिल करत भामती बतियाँ
Yugal Shataka — श्री भट्ट देवाचार्य
Verse 7 of 29
(राग विहागरौ, ताल चम्पक)
दोऊ मिल करत भामती बतियाँ। [1]
मदन गोपाल कुँवर राधे संग नखमनि अंक लिखत उर छतियाँ॥ [2]
तेसी छिरक रही उजियारी पून्यो चंद शरद की रतियाँ। [3]
केल रूप यह यमुना श्री भट वृन्दावन फूल्यो बहु भतियाँ॥ [4]
- श्री भट्ट देवाचार्य, युगल शतक (75)
(राग विहगरौ, ताल चम्पक) दोउ मिल करत भामति बतियाँ। [1] मदन गोपाल कुँवर लिखते हैं नखमनि अंक से राधे, उर छतियाँ.. [2] ज्योति ऐसी ही चमकती रहे, पावन चांदनी शरद की रातें। [3] केल रूप यमुना श्री भट्ट वृन्दावन फुल्यो बाहु भाटियां.. [4] - श्री भट्ट देवाचार्य, दोहरा शतक (75)