जो पथ रसिक महा मति जानै
Yugal Sneh Patrika — श्री चाचा हित वृंदावनदास
Verse 1 of 5
दुलह-दुलहिन हाथ डोरना बाँध्यौ राखत सजनी।
यह दिन इनकौं प्यारौ लागै याही सुख की भजनी॥ [1]
खेल खिलावै, मंगल गावैं, सुनै रससीर उपजनी।
वृन्दावन हित रूप छके छवि नित सुहाग की रजनी॥ [2]
- चाचा श्री हित वृंदावन दास, श्रीयुगल सनेह पत्रिका (58)
दूल्हा-दुल्हन ने एक-दूसरे के हाथ बांधे। इन लोगों के लिए यह दिन खुशी का गाना है। वृन्दावन हित की सुन्दर छवि हर विवाह की रानी है.. [2] - चाचा श्री हित वृन्दावन दास, श्रीयुगल सनेह पत्रिका (58)