जो पथ रसिक महा मति जानै

Yugal Sneh Patrika — श्री चाचा हित वृंदावनदास

Verse 2 of 5

जो पथ रसिक महा मति जानै रासेश्वरी जनायौ। कहैं सुनैं अनुसरैं सुमति नर वांछित सबनै पायौ॥ [1] कुमतिजु तर्क उठावैं अजहूं दई जिन्हें भरमायौ। वृन्दावन हित रूप कृपाजनितनि ही के उर भायौ॥ [2] - चाचा श्री हित वृंदावन दास, श्रीयुगल सनेह पत्रिका (57) जो पथ रसिक मह मति जनै रसेश्वरी जनयौ। सुनैन कहती है सुनैन, सुमति का अनुसरण करो, केवल वंचित लोग ही तुम्हें भुगतान करते हैं। वृन्दावन हित रूप कृपाजनितानि ही के उर भयौ.. [2] - चाचा श्री हित वृन्दावन दास, श्रीयुगल सनेह पत्रिका (57)
जो पथ रसिक महा मति जानैरसमय धाम सृष्टि