हेत करि देत श्री यमुने वास कुंजे

चतुर्भुजदास

Pada 15

हेत करि देत श्री यमुने वास कुंजे । जहाँ निसवासर रास में रसिकवर, कहां लों वरनिये प्रेमपुंजे ॥१॥ थकित सरिता नीर थकित ब्रजबधू भीर, कोउ न धरत धीर मुरली सुनीजे । चतुर्भुजदास यमुने पंकज जानि, मधुप की नामी चित्त लाय गुंजे ॥२॥
मनमोहन अद्भुत डोल बनीवारंवार श्रीयमुने गुणगान कीजे