वारंवार श्रीयमुने गुणगान कीजे

चतुर्भुजदास

Pada 16

वारंवार श्रीयमुने गुणगान कीजे । एहि रसनातें भजो नामरस अमृत भाग्य जाके हैं सोई जु पीजे ॥१॥ भानु तनया दया अति ही करुणामया इनहीं की कर आस अब सदाई जीजे । चतुर्भुजदास कहे सोई प्रभु पास रहे जोइ श्री यमुनाजी के रस जु भीजे ॥२॥
हेत करि देत श्री यमुने वास कुंजेप्राणपति विहरत श्री यमुना कूले