धाय के जाय जो श्री यमुना तीरे

छीतस्वामी

Pada 14

धाय के जाय जो श्री यमुना तीरे । ताकी महिमा अब कहां लग वरनिये, जाय परसत अंग प्रेम नीरे ॥१॥ निश दिना केलि करत मनमोहन, पिया संग भक्तन की हे जु भीरे । छीतस्वामी गिरिधरन श्री विट्ठल, इन बिना नेंक नहिं धरत धीरे ॥२॥
जा मुख तें श्री यमुने यह नाम आवे