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छीतस्वामी
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भई अब गिरिधर सों पैहचान
भई अब गिरिधर सों पैहचान
छीतस्वामी
Pada 4
भई अब गिरिधर सों पैहचान। कपट रूप धरि छल के आयौ, परषोत्तम नहिं जान।। छोटौ बड़ौ कछू नहिं देख्यौ, छाइ रह्यौ अभियान। "छीतस्वामि" देखत अपनायौ, विट्ठल कृपा निधान।।
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