भोग श्रृंगार यशोदा मैया

छीतस्वामी

Pada 5

भोग श्रृंगार यशोदा मैया,श्री विट्ठलनाथ के हाथ को भावें । नीके न्हवाय श्रृंगार करत हैं, आछी रुचि सों मोही पाग बंधावें ॥ तातें सदा हों उहां ही रहत हो, तू दधि माखन दूध छिपावें । छीतस्वामी गिरिधरन श्री विट्ठल, निरख नयन त्रय ताप नसावें ॥
भई अब गिरिधर सों पैहचानजय जय श्री सूरजा कलिन्द नन्दिनी