लीला लाल गोवर्धनधर की

कृष्णदास

Pada 17

लीला लाल गोवर्धनधर की। गावत सुनत अधिक रुचि उपजत रसिक कुंवर श्री राधावर की॥१॥ सात द्योस गिरिवर कर धार्यो मेटी तृषा पुरंदरदर की। वृजजन मुदित प्रताप चरण तें खेलत हँसत निशंक निडर की॥२॥ गावत शुक शारद मुनि नारद रटत उमापति बल बल कर की। कृष्णदास द्वारे दुलरावत मांगत जूठन नंदजू के घर की॥३॥
तरणि तनया तीर आवत हें प्रात समेपरम कृपाल श्री वल्लभ नंदन