परम कृपाल श्री वल्लभ नंदन

कृष्णदास

Pada 18

परम कृपाल श्री वल्लभ नंदन करत कृपा निज हाथ दे माथे । जे जन शरण आय अनुसरही गहे सोंपत श्री गोवर्धननाथ ॥१॥ परम उदार चतुर चिंतामणि राखत भवधारा बह्यो जाते । भजि कृष्णदास काज सब सरही जो जाने श्री विट्ठलनाथे ॥२॥
लीला लाल गोवर्धनधर कीफल्यो जन भाग्य