श्री गिरिधर लाल की बानिक ऊपर

कृष्णदास

Pada 21

श्री गिरिधर लाल की बानिक ऊपर आज सखी तृण टूटे री । चोवा चंदन अबीर कुंकुमा पिचकाइन रंग छूटे री ॥१॥ लाल के नैना रगमगे देखियत अंग अनंगन लूटे री । कृष्णदास धन्य धन्य राधिका अधर सुधा रस लूटे री ॥२॥
नवल वसंत नवल वृंदावनशरण प्रतिपाल गोपाल रति वर्धिनी