नवल वसंत नवल वृंदावन

कृष्णदास

Pada 20

नवल वसंत नवल वृंदावन खेलत नवल गोवर्धनधारी । हलधर नवल नवल ब्रजबालक नवल नवल बनी गोकुल नारी ॥१। नवल यमुना तटा नवल विमलजल नूतन मंद सुगंध समीर । नवल कुसुम नव पल्लव साखा कूजत नवल मधुपपिककीर ॥२॥ नव मृगमद नव अरगजा चंदन नूतन अगर सु नवल अबीर । नव वंदन नव हरद कुंकुमा छिरकत नवल परस्पर नीर ॥३॥ नवल बेनु महुवरी बाजे अनुपम नौतन भूषण नौतन चीर । नवल रूप नव कृष्णदास प्रभु को नौतन जस गावति मुनि धीर ॥४॥
फल्यो जन भाग्यश्री गिरिधर लाल की बानिक ऊपर