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कुम्भनदास
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साँझ के साँचे बोल तिहारे
साँझ के साँचे बोल तिहारे
कुम्भनदास
Pada 10
साँझ के साँचे बोल तिहारे। रजनी अनत जागे नंदनंदन आये निपट सवारे॥१॥ अति आतुर जु नीलपट ओढे पीरे बसन बिसारे। कुंभनदास प्रभु गोवर्धनधर भले वचन प्रतिपारे॥२॥
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