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कुम्भनदास
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रसिकिनि रस में रहत गड़ी
रसिकिनि रस में रहत गड़ी
कुम्भनदास
Pada 9
रसिकिनि रस में रहत गड़ी। कनक बेलि वृषभान नन्दिनी स्याम तमाल चढ़ी।। विहरत श्री गोवर्धन धर रति रस केलि बढ़ी।।
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