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कुम्भनदास
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संतन को कहा सीकरी सों काम
संतन को कहा सीकरी सों काम
कुम्भनदास
Pada 8
संतन को कहा सीकरी सों काम? आवत जात पनहियाँ टूटी, बिसरि गयो हरि नाम।। जिनको मुख देखे दुख उपजत, तिनको करिबे परी सलाम।। कुभंनदास लाल गिरिधर बिनु, और सबै बेकाम।।
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