चैत्र मास संवत्सर

परमानंददास

Pada 15

चैत्र मास संवत्सर परिवा बरस प्रवेस भयो है आज। कुंज महल बैठे पिय प्यारी लालन पहरे नौतन साज॥१॥ आपुही कुसुम हार गुहि लीने क्रीडा करत लाल मन भावत। बीरी देत दास परमानंद हरखि निरखि जस गावत॥२॥
नन्द बधाई दीजे हो ग्वालनप्रथम गोचारण चले कन्हाई