प्रथम गोचारण चले कन्हाई

परमानंददास

Pada 16

प्रथम गोचारण चले कन्हाई। माथे मुकुट पीतांबर की छबी वनमाला पहराइ ॥१॥ कुंडल श्रवण कपोल बिराजत, सुंदरता बनि आइ । घर घरतें सब छाक लेत हे संग सखा सुखदाइ ॥२॥ आगें धेनु हांक लीनी पाछे मुरली बजाइ। परमानंद प्रभु मनमोहन ब्रज बासिन सुरत कराइ॥३॥
चैत्र मास संवत्सरकापर ढोटा नयन नचावत