तिहारे चरन कमल को माहत्म्य

परमानंददास

Pada 27

तिहारे चरन कमल को माहत्म्य शिव जाने के गौतम नारी । जटाजुट मध्य पावनी गंगा अजहु लिये फिरत त्रिपुरारी ॥१॥ के जाने शुकदेव महामुनि के जाने सनकादिक चार । के जाने विरोचन को सुत सर्वस्व दे मेटी कुलगार ॥२॥ के जाने नारद मुनि ज्ञानी गुप्त फिरत त्रैलोक मंझार । के जाने हरिजन परमानंद जिनके हृदय बसत भुजचार ॥३॥
गोपी प्रेम की ध्वजाडोल माई झूलत हैं ब्रजनाथ