श्री यमुने सुखकारनी प्राण प्रतिके

परमानंददास

Pada 29

श्री यमुने सुखकारनी प्राण प्रतिके । जिन्हे भूलि जात पिय सुधि करि देत, कहाँ लों कहिये इनके जु हित के ॥१॥ पिय संग गान करे उमंगी जो रस भरे, देत तारी कर लेत झटके । दास परमानन्द पाये अब ब्रजचन्द अहि जानत सब प्रेम गति के ॥२॥
डोल माई झूलत हैं ब्रजनाथश्री यमुने पिय को बस तुमजु कीने