श्री यमुने पिय को बस तुमजु कीने

परमानंददास

Pada 30

श्री यमुने पिय को बस तुमजु कीने । प्रेम के फंद ते गहिजु राखे निकट ऐसे निर्मोल नग मोल लीने ॥१॥ तुमजु पठावत तहां अब धावत सदा, तिहारे रसरंग में रहत भीने । दास परमानन्द पाये अब ब्रजचन्द, परम उदार श्री यमुने जु दान दीने ॥२॥
श्री यमुने सुखकारनी प्राण प्रतिकेश्री यमुने के साथ अब फ़िरत है नाथ