श्री यमुने के साथ अब फ़िरत है नाथ

परमानंददास

Pada 31

श्री यमुने के साथ अब फ़िरत है नाथ । भक्त के मन के मनोरथ पूरन करत, कहां लो कहिये इनकी जु गाथ ॥१॥ विविध सिंगार आभूषन पहरे, अंग अंग शोभा वरनी न जात । दास परमानन्द पाये अब ब्रजचन्द राखे अपने शरण बहे जु जात ॥२॥
श्री यमुने पिय को बस तुमजु कीनेश्री यमुने की आस अब करत है दास