आज ललन की होत सगाई
परमानंददास
Pada 33
आज ललन की होत सगाई ।
आवो गोपी जन मिल गावो मंगलचार बधाई ॥१॥
चोटी चुपरू गु्हू सुत तेरी, छाडों चंचलताई।
वृषभान गोप टीको दे पठयो सुंदर जान कन्हाई ॥२॥
जो तुमको या भात देखहें, करहे कहा बढाई ।
पहरे बसन भूषण सुंदर, उनको देवो दिखाई ॥३॥
नख शिख अंग सिंगार महर मन, मोतिन की माला पहराई ।
बेठे राय रतन चोकी पर, नर नारिन की भीर सुहाई ॥४॥
विप्र प्रवीन तिलक कर मस्तक, अक्षत चाप लियो अपनाई ।
बाजत ढोल भेरी और महुवर, नोबत ध्वनि घनघोर बजाई ॥५॥
फूली फिरत यशोदारानी, वार कुंवर पर वसन लुटाई ।
परमानंद नंद के आंगन, अमरगन पोहपन झर लाई ॥६