कुंज भवन में मंगलचार

परमानंददास

Pada 34

कुंज भवन में मंगलचार । नव दुलहन वृषभान नंदिनी, दूल्हे ब्रजराज कुमार ॥१॥ नये नये पुष्पकुंज के तोरण, नव पल्लवी बंदनवार । चोरी रची कदंब खंडी में, सघन लता मंडप विस्तार ॥२॥ करत वेद ध्वनि विप्र मधुप गण कोकिला गण गावत अनुसार । दीनी भूर दास परमानंद प्रेम भक्ति रतन के हार ॥३॥
आज ललन की होत सगाईगावत गोपी मधु मृदु बानी