गावत गोपी मधु मृदु बानी

परमानंददास

Pada 35

गावत गोपी मधु मृदु बानी । जाके भवन बसत त्रिभुवनपति राजा नंद यसोदा रानी ॥१॥ गावत वेद भारती गावत गावत नारदादि मुनि ज्ञानी । गावत गुन गंधर्व काल सिव गोकुल नाथ महात्तम जानी ॥२॥ गावत चतुरानन जगनायक गावत शेष सहस्त्र मुखरासी । मन क्रम बचन प्रीति पद अंबुज अब गावत ‘परमानंद’ दासी ॥३॥
कुंज भवन में मंगलचार