गुरु बिनु ऐसी कौन करै ? माला-तिलक मनोहर बाना, लै सिर छत्र धरै । भवसागर तैं बूड़त राखै, दीपक हाथ धरै । सूर स्याम गुरु ऐसौ समरथ, छिन मैं ले उधरै ॥1॥
Pada 1
विनय तथा भक्ति · 1 padas
गुरु बिनु ऐसी कौन करै ? माला-तिलक मनोहर बाना, लै सिर छत्र धरै । भवसागर तैं बूड़त राखै, दीपक हाथ धरै । सूर स्याम गुरु ऐसौ समरथ, छिन मैं ले उधरै ॥1॥
Pada 1