दोहावली

दोहावली

भाग-4 दोहा संख्या 151 से 200 तक

दोहा संख्या 191 से 200 रघुपति कीरति कामिनी क्यों कहै तुलसिदासु। सरद अकास प्रकास ससि चारू चिबुक तिल जासु।191।
191
प्रभु गुन गन भूषन बसन बिसद बिसेष सुबेस। राम सुकीरति कामिनी तुलसी करतब केस।192।
192
राम चरित राकेस कर सरिस सुखद सब काहु। सज्जन कुमुद चकोर चित हित बिसेषि बड़ लाहु।193।
193
रघुबर कीरति सज्जननि सीतल खलनि सुताति। ज्यों चकोर चय चक्कवनि तुलसी चाँदनि राति।194।
194
राम कथा मंदाकिनी चित्रकूट चित चारू। तुलसी सुभग सनेह बन सिय रघुबीर बिहारू।195।
195
स्याम सुरभि प्य बिषद अति गुनद करहिं सब पान। गिरा ग्राम्य सिय राम जस गावहिं सुनहिं सुजान।196।
196
हरि हर जस सुर तर गिरहुँ बरनहिं सुकबि समाज। हाँडी हाटक घटित चरू राँधे स्वाद सुनाज।197।
197
तिल पर राखेउ सकल जग बिदित बिलोकत लोग। तुलसी महिमा राम की कौन जानिबे जोग।198।
198
राम सरूप तुम्हार बचन अगोचर बुद्धिपर। अबिगत अकथ अपार नेति नेति नित निगम कह।199।
199
माया जीव सुभाव गुन काल करम महदादि। ईस अंक तें बढ़त सब ईस अंक बिनु बादि।200।
200
Section 4 · 4Section 5 · 1