दोहावली
दोहावली
भाग-9 दोहा संख्या 401 से 450 तक
दोहा संख्या 411 से 420
बचन बिचार अचार तन मन करतब छल छूति।
तुलसी क्यांे सुख पाइये अंतरजामिहि धूति।411।
411
सारदूल को स्वाँग करि कूकर की करतूति ।
तुलसी तापर चाहिऐ कीरति बिजय बिभूति।412।
412
बड़े पाप बाढे़ं किए छोटे किए लजात।
तुलसी ता पर सुख चहत बिधि सों बहुत रिसात।413।
413
देस काल करता करम बचन बिचार बिहीन।
ते सुरतरू तर दारिदी सुरसरि तीर मलीन।।414।
414
साहस हीं कै कोप बस किएँ कठिन परिपाक।
सठ संकट भाजन भए हठि कुजाति कपि काक।415।
415
राज करत बिनु काजहीं करहिं कुचालि कुसाजि।
तुलसी ते दसकंध ज्यों जइहैं सहित समाज।416।
416
राज करत बिनु काजहीं ठजहिं जे कूर कुठाट।
तुलसी ते कुरूराज ज्यों जइहैं बारह बाट।417।
417
सभा सुयोधन की सकुनि सुमति सराहन जोग।
द्रोन बिदुर भीषम हरिहि कहहिं प्रपंची लोग।418।
418
पांडु सुअन की सदसि ते नीको रिपु हित जानि।
हरि हर सम सब मानिअत मोह ग्यान की बानि।।419 ।
419
हित पर बढइ बिरोध जब अनहित पर अनुराग।
राम बिमुख बिधि बाम गति सगुन अघाइ अभाग।420।
420