दोहावली
दोहावली
भाग-9 दोहा संख्या 401 से 450 तक
दोहा संख्या 441 से 450
राम लखन बिजई भए बनहुँ गरीब निवाज।
मुखर बालि रावन गए घरहीं सहित समाज।441।
441
खग मृग मीत पुनीत किय बनहुँ राम नयपाल।
कुमति बालि दसकंठ धर सुहृद बंध्ुा कियोे काल।442।
442
लखइ अघानो भूख ज्यों लखइ जीतिमें हारि।
तुलसी सुमति सराहिऐ मग पग धरइ बिचारि।443।
443
लाभ समय को पालिबो हानि समय की चूक ।
सदा बिचारहिं चारूमति सुदिन कुदिन दिन दूक।444।
444
सिंधु तरन कपि गिरि हरन काज काज साइँ हित दोउ।
तुलसी समयहिं सब बड़ो बूझत कहुँ कोउ कोउ।445।
445
तुलसी मीठी अमी तें मागी मिलै जो मीच ।
सुधा सुधाकर समय बिनु कालकूट तें नीच।446।
446
तुलसी असमय के सखा धीरज धरम बिबेक।
साहित साहस सत्यब्रत राम भरोसो ऐक।447।
447
समरथ कोउ न राम सों तीय हरन अपराधु।
सतयहिं साधे काज सब समय सराहिहिं साधु।448।
448
तुलसी तीरहु के चलें समय पाइबी थाह।
धाइ न जाइ थहाइबी सर सरिता अवगाह।449।
449
तुलसी जसि भवतब्यता तैसी मिलइ सहाइ।
आपुनु आवइ ताहि पै ताहि तहाँ लै जाइ।450।
450